2022 विधानसभा चुनाव के लिए एकजुट होगा यादव कुनबा

2022 विधानसभा चुनाव के लिए एकजुट होगा यादव कुनबा

होली के दिन मंगलवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार और कांग्रेस को करारा झटका देकर उनके त्योहार को बदरंग कर दिया. लेकिन उत्तर प्रदेश के इटावा के सैफई में सियासी यादव कुनबे के लिए दूसरी तस्वीर ही सामने आई. सैफई में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नाराज माने जाने वाले अपने चाचा शिवपाल यादव के पैर छुए.

एक ही मंच पर दोनों की मौजूदगी ने समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बढ़ा दिया और वो चाचा-भतीजा जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. अब सवाल उठता है कि चाचा-भतीजे का ये मिलाप क्या 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यादव कुनबे की एकजुटता का संकेत है?

मंगलवार को होली के मौके पर सैफई में शिवपाल जैसे ही मंच पर पहुंचे, परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में अखिलेश ने उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया. 2017 विधानसभा चुनाव में हार के बाद ये पहला मौका था जब सार्वजनिक तौर पर अखिलेश और शिवपाल एक ही मंच पर साथ दिखाई दिए.

दोनों को साथ देखकर पार्टी समर्थकों ने चाचा-भतीजा जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए तो अखिलेश ने हाथ के इशारे से उन्हें ऐसा करने से रोका. इस मौके पर शिवपाल यादव ने भी अपने बड़े चचेरे भाई रामगोपाल से आशीर्वाद लिया. बता दें कि 2017 विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल ने रामगोपाल पर कई बार पार्टी और परिवार में मतभेद पैदा करने का आरोप लगाया था.

सैफई में कुनबे के इस मिलाप का ये नजारा शिवपाल यादव की ओर से हाल में 2022 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ने की इच्छा जताने के बाद सामने आया हैसमाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 14 मार्च को लखनऊ में बुलाई गई है, जिसमें संगठन को मजबूती और नई धार देने के लिए कई अहम फैसले लिए जाने की संभावना है.

 बीजेपी को चुनाव में चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं में नए सिरे से जोश भरना चाहती है. ये देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश इस मौके पर शिवपाल यादव से मतभेद समाप्त होने की दिशा में और कुछ संकेत देते हैं या नहीं.अखिलेश के एक करीबी नेता ने नाम नहीं खोलने की शर्त पर कहा,आने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी को सत्ता में वापस आने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. 

हम समझते हैं कि हमारे पार्टी अध्यक्ष और शिवपाल यादव के लिए सभी मतभेदों को खत्म कर एकजुट होना जरूरी है. हम अपने संगठन को मजबूत कर लोगों से जुड़े मुद्दों पर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने के लिए जोरदार मुहिम की उम्मीद करते हैं. हम आशा करते हैं कि परिवार एकजुट होगा. हालांकि आखिरी फैसला हमारी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लेंगे.

शिवपाल यादव इटावा के जसवंत नगर से विधायक हैं. 2017 विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से अखिलेश यादव ने बड़ी बेरूखी से हटा दिया गया था. फिर आगे चलकर 2018 में शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के नाम से अपनी अलग पार्टी बनाई थी जिसमें समाजवादी पार्टी के कई असंतुष्ट नेताओं को शामिल किया गया था.

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