योगी राज्य में पड़ता यूपी का राजस्व

योगी राज्य में पड़ता यूपी का राजस्व

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के तीन वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दौरान उपलब्धियों के दावे-प्रतिदावे के बीच कुछ बातें चैंकानेवाली हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े का बढ़ना, एक्सपोर्ट में 28 फीसदी की बढ़ोतरी। देश भर में आर्थिक मंदी के शोर के बीच यह जानकारी सोचने को मजबूर करती है और योगी आदित्यनाथ को उनकी प्रचारित छवि से अलग नजरिए से देखने को विवश करती है।

आरबीआई एवं एनएसओ के आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2018-19 में प्रति व्यक्ति आय में 8519 रुपये की वृद्धि हुई 2014-15 की तुलना में। यानी 4.92 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से इजाफा हुआ। उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 2014-15 में 34583 रुपये थी जो 2018-19 में 43102 रुपये हो गई। योगी आदित्यनाथ की सरकार के तीन वर्ष के दौरान प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 38965 रुपये (2016-17) से बढ़कर 43102 रुपये (2018-19) हो गई। यानी 4137 रुपये (2011-12 बेस वर्ष) की वृद्धि हुई। उत्तर प्रदेश की जैसी छवि है, उसके अनुसार यह अजूबा सा लगता है। गेरुआ कपड़ों में रहनेवाले हार्डकोर हिंदुत्ववादी नेता, जिसे लुटियंस बुद्धिजीवी गाय और गोबर से जोड़कर निंदा के भाव से व्याख्यायित करते रहे हों, का फाइनेंस मैनेजमेंट सबको आईना दिखा रहा है।

पूरे देश की निर्यात वृद्धि दर 10.03 प्रतिशत (2016-17 से 2017-18) से घटकर 8.70 प्रतिशत (2017-18 से 2018-19) हो गई, परंतु उत्तर प्रदेश का योगदान भारत के निर्यात में 4.67 प्रतिशत (2016-17) से बढ़कर 4.80 प्रतिशत (2018-19) हो गया। पूरे देश का एक्सपोर्ट डाउन हुआ, पर उत्तर प्रदेश का एक्सपोर्ट 28 फीसदी बढ़ गया। कैसे? योगी आदित्यनाथ खुद बताते हैं कि आजादी के समय प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय देश की प्रति व्यक्ति आय के बराबर थी। कहीं बांसुरी बनाने का काम था, कहीं टेराकोटा का तो कहीं चिकनकारी का। देश और विदेश के संस्थानों से ये व्यावसायिक तौर पर जुड़े थे। बाद में सरकारों की उपेक्षा के कारण ये न सिर्फ पुराने संपर्कों से कट गए बल्कि धीरे-धीरे लुप्तप्राय हो गए। इसलिए प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी कम होती चली गई। योगी सरकार ने इन उद्यमों को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के रूप में पहचान दी और सरकारी सहयोग बढ़ाकर इन्हें तकनीक और बाजार से जोड़ा। सिर्फ ओडीओपी से 10 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।

जब बीजेपी सत्ता में आई थी तो प्रदेश की स्थिति अच्छी नहीं थी। उसी में किसानों का कर्ज माफ भी करना था। योगी खुद कहते हैं कि कर्जमाफी की कार्रवाई के दौरान हमने वहां कैंची चलाई, जहां लीकेज थे। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का टेंडर रद कर 2018 में फिर से करवाया तो अमाउंट उतनी ही आई जितनी अखिलेश सरकार में थी। जब टेंडर प्रक्रिया देखी गई तो पता चला कि टेक्निकल और फाइनैंशल बिड अलग-अलग मंगाई गई थी। फिर उन्होंने दोनों बिड एक साथ मंगाने को कहा। अखिलेश यादव ने दिसंबर 2016 में 110 मीटर चैड़े और 340 किमी लंबे एक्सप्रेस वे की कॉस्ट निकाली थी 15 हजार 200 करोड़। अब 120 मीटर चैड़ा और 341 किमी लंबा एक्सप्रेस वे बन रहा है 11 हजार 800 करोड़ में। जो बीच में पैसे लेने वाले थे वे सब गायब हो गए। ऐसे अनेक प्रॉजेक्टों में लीकेज दूर करना योगी सरकार की सफलता रही।

पहली बार उत्तर प्रदेश में धान, गेहूं, तिलहन, दलहन, आलू, मक्के के लिए प्रोक्युरमेंट पॉलिसी लागू की गई। सरकार ने मंडी को एक भी पैसा अपने पास से नहीं दिया। लेकिन 2016 में मंडी की इनकम थी 600 करोड़, आज इनकम 2 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। वैट 49 हजार करोड़ था, आज 76000 करोड़ है। एक्साइज से मिलता था 13000 करोड़ रुपये, आज 37000 करोड़ मिलता है। माइनिंग 13 सौ करोड़ का था। माइनिंग के दाम आज भी यूपी में 2017 वाले हैं, पर आय 4000 करोड़ तक बढ़ गई है। जीएसटी 8000 करोड़ से 23000 करोड़ पहुंच रहा है। यह हिंदुत्व के चेहरे योगी आदित्यनाथ के फाइनैंशल मैनेजमेंट को दिखाने के लिए काफी है।

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