क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल जोखिम बढ़ाएगा

Ban imposed by cryptocurrency Indian Reserve removed

                                                                                                                                            सतीश सिंह
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) या आभासी मुद्रा पर भारतीय रिजर्व द्वारा लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया। अब लोग बिना रोक-टोक इससे लेन-देन कर सकेंगे। रिजर्व बैंक ने 2018 में इस पर प्रतिबंध लगाया था। प्रतिबंध के खिलाफ इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने याचिका दाखिल की थी। क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा है जो भौतिक रूप में उपलब्ध नहीं होती। यह केवल आभासी मुद्रा (वर्चुअल करेंसी) है। इसका उपयोग लेन-देन के लिए किया जाता है। इसके लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है। इस करेंसी में कूटलेखन (कोड) का प्रयोग होता है। इसके इस्तेमाल में धोखाधड़ी की आशंका बहुत कम होती है।

इंटरनेट पर इस वर्चुअल करेंसी की शुरुआत जनवरी 2009 में बिटकॉइन के नाम से हुई थी। वर्तमान में बाजार में इसके अलावा और भी कई आभासी मुद्राएं मसलन, इथेरियम, रिपल और कारडानो मौजूद हैं। फिलहाल 2,116 क्रिप्टो करेंसी प्रचलन में हैं, जिनका बाजार पूंजीकरण 119.46 अरब डॉलर का है। कैंब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2017 में कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक 29 से 58 लाख लोग उस समय आभासी मुद्रा का इस्तेमाल कर रहे थे। अभी सिर्फ भारत में बिटकॉइन (Bitcoin)  के 50 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं। सामान्य मुद्रा की तरह आभासी मुद्रा का मुद्रास्फीति से कोई लेना-देना नहीं है। बाजार के उतार-चढ़ाव से भी यह मुक्त है। इसका लेन-देन गैरकानूनी तरीके से होने के कारण इससे जुड़े विवाद में किसी को सजा नहीं दी जा सकती है। चूंकि यह किसी बैंक से जुड़ी हुई नहीं है इसलिए इसका कोई नियामक भी नहीं है।

आभासी मुद्रा को फिलहाल लेन-देन का सरल तरीका माना जा रहा है। जर्मनी के वित्त मंत्रालय ने इसे ‘खाते की एक इकाई’ के रूप में मान्यता दे दी है। लेकिन अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ने इससे संबंधित सिल्क रोड नाम के ऑनलाइन फोरम को बंद कर दिया है, क्योंकि वहां अवैध वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन बिटकॉइन (Bitcoin) के जरिए किया जा रहा था। आभासी मुद्रा के पूरी तरह से चलन में आ जाने के बाद निश्चित तौर पर देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा, लेकिन इसका स्वरूप कैसा होगा, बताना आसान नहीं है। माना जा रहा है कि आभासी मुद्रा के वैध मुद्रा बनने के बाद बैंकों का अस्तित्व खत्म जाएगा और आर्थिक क्षेत्र के बहुत सारे मानक भी बदल जाएंगे। सवाल है कि ऐसे लोग जो न सिर्फ आज बल्कि लंबे समय तक आभासी मुद्रा से अनजान रहेंगे, वे अपने पैसे कहां रखेंगे और जरूरत पड़ने पर कर्ज कहां से लेंगे? विवाद होने पर निपटारा कौन करेगा? इन प्रश्नों के जवाब आभासी मुद्रा के पैरोकारों के पास नहीं हैं।

कुछ महीनों पहले बंगलुरु में देश का पहला बिटकॉइन एटीएम खोलने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। इस एटीएम के जरिए कारोबारी अपने क्रिप्टो वॉलेट में रुपये जमा कराकर आभासी मुद्रा में कारोबार करना चाहते थे। जरूरत पड़ने पर वे इस एटीएम से रुपयों की निकासी भी कर सकते थे। इसके लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं थी। शुरू में इस एटीएम से जमा और निकासी की सीमा 1000 रुपये रखी गई थी और भविष्य में निकासी की अधिकतम सीमा डेढ़ से दो लाख रुपये तक किए जाने की संभावना थी। गौरतलब है कि आभासी मुद्रा का एक्सचेंज ‘उनोकॉइन’ भारत में कार्यरत है। वर्तमान में यह 30 आभासी मुद्राओं में कारोबार करने की सुविधा दे रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण यह एक्सचेंज क्रिप्टो कारोबार को बढ़ाने के नए विकल्पों की तलाश कर रहा था। इसके प्रयास से ही क्रिप्टो एटीएम के रूप में नया विकल्प सामने आया था। अब यह मुक्त रूप से कार्य कर सकेगा। आभासी मुद्रा के कारोबार में हो रही बढ़ोतरी यह बताती है कि इसमें कारोबार करने वाले इस पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं। इस बीच आभासी मुद्रा के एक्सचेंजों ने इस मुद्रा में परस्पर कारोबार की सुविधा देकर रुपये पर निर्भरता कम करने की कोशिश की है। कुछ एक्सचेंज पीयर-टू-पीयर प्लैटफॉर्म जैसी सुविधा कारोबारियों को उपलब्ध करा रहे हैं। भारत में खुदरा कारोबारी बिना किसी नियामक के आभासी मुद्रा में कारोबार कर रहे हैं। कारोबारियों का मानना है कि इस कारोबार पर प्रतिबंध लगाने से अच्छा है कि इसका नियमन किया जाए और इस संबंध में स्पष्ट कानून बनाया जाए क्योंकि भारत में आभासी मुद्रा के भविष्य का निर्धारण होना बाकी है।

रिजर्व बैंक का कहना है कि आभासी मुद्रा की अपनी कोई कीमत नहीं होती और इसके द्वारा अवैध कारोबार किए जाने की आशंकाएं बहुत ज्यादा हैं। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना संभव नहीं है। रिजर्व बैंक के अनुसार आभासी मुद्रा को सहेजने के लिए बनाए गये इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट के साथ भी हैंकिंग, पासवर्ड चोरी और मैलवेयर के हमले जैसी सुरक्षा समस्याएं मौजूद हैं। इन खतरों को लेकर रिजर्व बैंक लंबे समय से लोगों को आगाह करता रहा है। फरवरी 2017 में उसने आभासी मुद्रा के कारोबारियों को, यानी बिटकॉइन समेत किसी भी आभासी मुद्रा में कारोबार कर रहे लोगों को इससे जुड़े ग्राहक हितों और सुरक्षा संबंधी वित्तीय और कानूनी खतरों से सावधान किया था।

इस मुद्रा को किसी टकसाल में नहीं ढाला जाता इसलिए इसका लेन-देन दूसरी मुद्राओं की तरह वैधानिक नहीं है। बिटकॉइन (Bitcoin) का लेन-देन सार्वजनिक होता है पर उपयोगकर्ताओं की पहचान गुप्त होने के कारण कोई गड़बड़ी होने पर दोषी का पकड़ में आना मुश्किल होता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आभासी मुद्रा पर प्रतिबंध हटाने से इसका उपयोग करने वाले कारोबारियों को अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा, लेकिन इससे जुड़े जोखिम अपनी जगह पर बने रहेंगे। इसके खतरों से निपटने में भारत का कानूनी और मौद्रिक ढांचा अभी समर्थ नहीं है इसलिए सरकार को इससे संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए और जहां तक संभव हो वहां तक इसे नियमों के दायरे में लाना चाहिए।

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